Meri Diary Se

जिंदगी एक हादसा है जो रोज़ होता है. कभी हम बच जाते और कभी मर जाते हैं.

Posted On January 17, 2017 at 5:05 pm by / No Comments

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इन्सान जब इस धरती पर जन्म लेता है तब वह जन्म लेते ही अनेक रिश्तो से घिर जाता है. इस धरती पर इन्सान के रूप में आने के बाद हम किसी के रिश्तेदार हो जाते हैं, किसी के दोस्त हो जाते हैं, किसी के बेटा/बेटी हो जाते हैं, किसी के भाई-बहन हो जाते हैं. चारो तरफ से रिश्तो से घिर जाने के बाद हम एक-दुसरे के लिए जीना शुरू कर देते हैं. एक-दुसरे की परवाह करने लगते हैं. एक के दुःख से दुसरे को दुःख होता है, एक की ख़ुशी से दुसरे को ख़ुशी मिलती है. धीरे-धीरे हम पूरी तरह से एक-दुसरे पर डिपेंड होने लगते हैं. डिपेंड इन दा सेंस भावनात्मक रूप से व आर्थिक रूप से.

जीवन के इस चक्र का अंतिम द्रश्य क्या होता है ये हम सभी जानते हैं. अंतिम द्रश्य यानि मृत्यु. मृत्यु पढने-सुनने में जितना आसान सा शब्द लगता है वास्तव में उतना ही कष्टदायक है ये शब्द. जिस पर गुजरती है वही जानता है. दुनिया के इस मेले में हम जन्म लेते हैं. दुसरो से मिलते हैं. इमोशनली, फाइनेंसियली अटैच्ड हो जाते हैं और फिर अचानक से एक दिन बिना बताये किसी एक को मृत्यु आ जाती है. सब कुछ जैसे थम जाता है. जब किसी एक को मरना ही होता है तो फिर एक-दुसरे पर इतना डिपेंडेंट क्यों हो जाते हैं हम.

मौत अगर वक़्त पर आये तो शायद इतना दुःख नही होता होगा जितना दुःख बेवक्त आई मौत पर होता है. जिसके साथ जीने के सपने बुने हो अचानक से वही हमेशा के लिए छोड़ कर चला जाये. उस वक़्त, उस घडी में सपने चूर-चूर तो हो ही जाते हैं. साथ ही साथ इन्सान के मन से वो सारी उम्मीदें भी खत्म हो जाती हैं जो उसने अपने भविष्य से लगाई हुई थी.

भविष्य … कितना अच्छा लगता है सुनने में. हम रात-दिन अपने भविष्य के सपने बुनते रहते हैं, उस भविष्य के जो शायद अगले पल हो भी न. जिंदगी में टर्निंग पॉइंट आते हुए देर नही लगती. अभी एक महीने पहले बैठ कर मैंने कुछ सपने बुने थे और अभी आज मुझे पता चला कि जिंदगी तो चल पड़ी है अपनी मंजिल की और. मेरे सपनो के पूरा हुए बिना ही. कैसा लगता है. यकीन नही होता जीवन नाम की इस संस्था पर. जो हमेशा लाभ के पीछे भागती है. कल के पीछे भागती है. वो कल जिसका पता ही नही होता कि वो आएगा भी या नही.

“क्या कहूँ तुम्हे, टेक इट इजी भी नही कह सकती हूँ, जानती हूँ कि जो हो रहा है उसमे कुछ भी इजी नही लिया जा सकता. तुम क्या महसूस कर रही हो ये तुम ही जानती हो. मैं बस तुम्हारे दुःख का कुछ हिस्सा महसूस कर पा रही हूँ. कुछ हिस्सा जो मुझ जैसे हर एक सवेंदनशील इन्सान को महसूस होता है”.

किसी की जिंदगी और मौत के बीच में अक्सर कुछ लोग पिस कर रह जाते हैं. ये वही लोग होते हैं जो उस मरने वाले पर डिपेंड होते हैं इमोशनली या फाइनेंसियली. बाकि दुनिया के लिए तो रोज घटनाये घटती हैं. रोज़ लोग मरते हैं. रोज़ मातम मनाया जाता है. और रोज़ खुशियाँ मनायी जाती हैं.

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