Hindi Poem (हिंदी कविता)

मैं रोज सोचती हूँ …

तुम रोज मरते हो थोडा-थोडा मुझ में और मैं रोज सोचती हूँ मेरे अंदर ये घुटन क्यों हैं ..... तुम रोज़ होते हो जिन्दा कतरा-कतरा मुझ में और मैं रोज सोचती हूँ मैं जिन्दा क्यों हूँ ..... ...
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