Hindi Poem (हिंदी कविता)

रखकर हथेली पर उम्मीदो को फूंक से उड़ा दिया…

Posted On August 12, 2017 at 7:36 pm by / No Comments

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रखकर हथेली पर उम्मीदो को फूंक से उड़ा दिया
एक ख्वाब जो आया था देहरी पे उसे वापस लौटा दिया …

उम्मीदें अक्सर इंसान को अन्दर ही अन्दर खोखला करती चली जाती हैं, फिर वो किसी इंसान से की गई हों या फिर प्रकृति से। जब बार-बार उम्मीद टूटती है तब एक दिन ऐसा आता है कि इंसान बेउम्मीद होकर जीने लगता है। सच कहूं तो बेउम्मीदी में जीना खौखली उम्मदों में जीने से कहीं बेहतर है, कम से कम बाद में तकलीफ तो नही होती।

उम्र जब धीरे-धीरे बढ़ने लगती है रिश्तो के सही मायने तब पता चलते हैं, उम्र के एक पड़ाव पर पँहुचने के बाद पता चलता है कि हमारे आस-पास रिश्तो की जो भीड इक्कट्ठा रहती है वो वास्तव में हमारे साथ नही होती ब्लकि वो तो उस रिश्ते के साथ होती है जो जिसके साथ उनका कोई रिश्ता होता है।

शमां जलती रही शमां बुझती रही
मेरे अन्दर जो एक आग जली थी तब
मेरे भरोसे पर कुछ रिश्तो की
चोट पड़ने पर …..
वो आग अब और सुलग बैठी है
तेरे यूं बदल जाने पर …..।।।

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