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परफेक्ट …

Posted On August 1, 2016 at 4:02 pm by / 2 Comments

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“परफेक्ट तो कोई भी नही होता”, तुम भी तो नही हो परफेक्ट, अर्पिता ने शिवम की आँखों में आँखे डालकर देखते हुए कहा तो वो कुछ झल्ला सा गया…..

कौन कहता है मैं परफेक्ट नही हूँ, अच्छी जॉब है, पैसा है, अपना घर है, गाड़ी है, सब कुछ तो है मेरे पास, हजारो लड़कियां लाइन में खड़ी हैं मुझसे शादी करने के लिए, शिवम ने बड़े ही गुरुर से अर्पिता की और देखते हुए कहा तो वो कुछ हल्का सा मुस्कुरा सी दी ….

हाँ, सही तो कहते हो, हजारो लड़कियां हैं तुम्हारे पीछे, हजारो आप्शन हैं तुम्हारे पास, आई थिंक तुम्हें उन हजारो में कोई तो परफेक्ट मिल ही सकती है, अर्पिता की आवाज़ में कुछ गंभीरता थी जिसे शिवम भांप गया था, अर्पिता की बातो ने शिवम के अंदर पल रहे गुरुर को कुछ देर के लिए शांत कर दिया था…

तुम जानती हो, मैं शादी करूँगा तो सिर्फ और सिर्फ तुमसे, फिर भी ये सब कह रही हो ? शिवम ने अर्पिता के हाथ को अपने हाथो में लेते हुए कहा तो अर्पिता हल्के से मुस्कुराने लगी …..

हाँ जानती हूँ मगर मैं परफेक्ट नही हूँ मैं ये भी जानती हूँ और न ही कभी बन सकती हूँ, ये तुम भी अच्छे से जानते हो, तुम्हारे पेरेंट्स के मन मुताबिक परफेक्ट मैं कभी नही बन सकती शिवम, कहकर अर्पिता चुप हो गयी ….

अर्पिता की बातो ने शिवम की गर्दन को नीचे झुकने पर मजबूर कर दिया था, अर्पिता के हाथ को अपने हाथो से आज़ाद कर चूका था वह, पकड़ता भी किस हक़ से, अपने मम्मी-पापा को अच्छे से जानता था, जानता था कि उन्हें उसके लिए एक परफेक्ट लड़की चाहिए, एक परफेक्ट लड़की, जो सिर्फ दिखने में ही अच्छी न हो बल्कि उनके मन मुताबिक दहेज़ भी ला सके, पढ़ी-लिखी भी हो और उनके ही लेवल के खानदान से ताल्लुक रखती हो, अर्पिता कहाँ पसंद है उन्हें, वो पढ़ी-लिखी है उसके जितनी ही मगर उतना पैसा उसके माँ-बाप नही दे सकते, उनका स्टेटस इतना ऊँचा नही है न…….

चलो चलती हूँ, काफी देर हो गयी, अर्पिता की आवाज़ ने शिवम के विचारो के महल को तोडा ….

हम्म, चलो मैं छोड़ देता हूँ, शिवम ने टेबल से अपनी गाड़ी की चाबी उठाते हुए कहा तो अर्पिता ने मुस्कुरा कर मना कर दिया, “मैं चली जाउंगी, पापा यहीं पास में ही कुछ सामान लेने के लिए रुके हैं, उन्होंने कहा था कि वापसी में मुझे अपने साथ ही ले चलेंगे”, अर्पिता ने कहा तो शिवम चौंक गया …..

क्या? अंकल को पता है कि तुम मुझसे मिलने आई हो, शिवम ने हैरानी से पूछा ….

हाँ, पापा ने ही मुझे यहाँ ड्राप किया था, कल घर पर कुछ लोग आ रहे हैं, तो कुछ सामान लेना था, फिर तुमसे भी मिलना था आखरी बार तो पापा …. कहते-कहते अर्पिता चुप हो गयी …..

अर्पिता की आँखों में नमी थी, शिवम समझ नही पा रहा था कि आगे क्या कहे, खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा था वह, क्या फायदा इतना पढने-लिखने का अगर इसी तरह ही जीना है तो, क्या बिना दहेज़ मिले, बिना स्टेटस मिले शादी कभी चल ही नही सकती है, काश ……. काश ……

अर्पिता जा चुकी थी मगर शिवम अभी भी वहीं का वहीं बैठा था, एक तरफ अर्पिता थी दूसरी तरफ पेरेंट्स, आखिर वो चुने भी तो किसे? आज पहली बार उसके मन में एक ख्याल आया था – काश मैं भी अर्पिता के जितना ही परफेक्ट होता, मम्मी-पापा जितना अमीर नही …..!!!

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2 thoughts on “परफेक्ट …

  1. Ye chhoti chhoti si kahaniya hame jivan ki badi badi bato se ru-b-ru krati h…..or sach me Jane shivam jse kitne hi aise dil h jo toot jate h….or kitni hi arpita bikhar jati h….kya padhai or nokri sirf shadi me dahej ke liye chahiye hoti h….ptani kab meta desh update hoga…bhai koi batao ise ye bahut purana processes h isko fenko or update version lao…

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