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मेरी पहली मौहब्बत …

Posted On January 11, 2017 at 2:46 pm by / No Comments

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तुम्हे जब पहली बार देखा था तब इश्क जैसा कुछ महसूस ही नही हुआ था, जब दूसरी बार मिला तब भी कुछ खास महसूस नही हुआ. फिर जब कई बार मिला तब भी बस मिलने के लिए मिलता था तुमसे. ऐसा कभी लगा ही नही कि मुझे तुमसे इश्क है इसलिए मैं तुमसे मिल रहा हूँ. तुम मेरे दोस्त की दोस्त थी तो मिल लेता था उसके साथ आने के बहाने तुमसे. फिर जब एक दिन अचानक मेरे दोस्त ने तुमसे मिलना बंद कर दिया जिसकी वजह से मैं भी तुम से नही मिल पाया तब उस दिन दिल में थोडा सा कुछ हुआ था. कुछ अजीब सा. एक अजीब सी बेचैनी थी उस दिन.

किस बात की बेचैनी यही पूछना चाहती हो न :), जानता हूँ. तुमसे न मिलने की बेचैनी. उस दिन जब तुमसे नही मिला तब मैंने जाना कि तुम मुझे याद आ रही हो …..

धीरे-धीरे मैं तुम्हे महसूस करने लगा था. तुम्हे न देखने की बेचैनी साफ झलकने लगी थी मेरी आँखों में. तुम्हे याद है उस दिन जब मैंने पहली बार तुम्हे फ़ोन किया था और मिलने के लिए पूछा था. हाँ जानता हूँ याद तो होगा ही, मेरी ही तरह तुम्हारी भी तो पहली सच्ची मौहब्बत थी न वो. तुम भी कैसे भूल सकती हो. हाँ तो मैं कह रहा था कि जब मैंने पहली बार तुम्हे फ़ोन कर के मिलने के लिए बोला था तब तुम कितनी असहज सी हो गयी थी और उसी हडबडाहट में तुमने झट से मुझसे पूछ लिया था- “क्यूँ मिलना है मुझसे ? तुम्हें क्या काम आन पड़ा ? और मैं फ़ोन पर ही मुस्कुरा दिया था. कितनी जल्दी घबरा जाती हो न तुम, पागल ……

मेरे कई बार कहने पर बस दो बार मिलने आई थी तुम मुझसे और उस पर भी बस 10 मिनट के लिए. घर वाले निकलने नही देंगे कॉलेज जो खत्म हो गया है. यही बहाना बनाती थी न तुम. तुम्हारे इन मासूम से बहानो पर हँसी आती थी मुझे. वो घर वाले जिन्होंने तुम्हे कभी कहीं जाने से नही रोका मुझसे मिलने से रोकेंगे. पागल इतना तो समझता हूँ मैं. अरुण मेरे दोस्त से मिलने से कभी किसी ने नही रोका उन्होंने तुम्हे फिर मुझसे मिलने से क्यों रोकता कोई ….

वो तुम्हारे घर वाले नही थे जो तुम्हे रोक रहे थे वो तो तुम्हारा खुद का दिल था जो किसी के साथ जुड़ना ही नही चाहता था. तुम प्यार में पड़ना नही चाहती थी. 🙂 प्यार को महसूस नही करना चाहती थी. पागल तुम इतना भी नही जानती थी कि प्यार में जान-बूझकर पड़ा नही जाता, प्यार तो खुद आकर गले पड़ जाता है, वो भी ऐसा गले कि पीछा छुटाए से भी नही छुटता …. 🙂

आह तेरी मौहब्बत के अफसाने जब भी याद आते हैं दिल चीर जाते हैं …… 

ये इश्क भी कितनी अजीब चीज होता है न, दिल में आग लगाकर रख देता है. मैं जलना नही चाहता था मगर तुम्हारी यादो ने मुझे जलने पर मजबूर कर दिया था. क्या? ऐसे क्यों देख रही हो? मैं सच कह रहा हूँ. तुम्हारी यादो ने ही मुझे इतना खोखला बना दिया है कि जिन्दगी की तरफ हाथ भी बढाता हूँ तो मेरे हाथ कांपने लगते हैं. मैं चाह कर भी आगे नही बढ़ पाता. जब कोशिश करता हूँ, कदम आगे बढाता हूँ तुम्हारी यादें मेरा हाथ पकड़कर रोक लेती हैं. मैं रुकना नही चाहता मगर जब भी देखता हूँ पीछे मुड़कर तुम्हारी मासूम सी यादो को तो चाहकर भी अपने कदम आगे नही बढ़ा पाता. कल तुम मेरी हिम्मत थी तो आज मेरी कमजोरी बन गयी हो…..

बहुत सी बातें हैं जो तुमसे कहना चाहता था मगर वक़्त ने इतना वक़्त ही नही दिया कि तुमसे इतना भी कह पाता कि मुझे तुमसे मौहब्बत है. पहले हिम्मत नही थी. और फिर जब हिम्मत हुई तब तुम नही थी…..

इश्क की ख्वाहिशें
अधूरी ही रह जाती हैं
तब जब दो प्रेमी
एक-दुसरे को
समझ नही पाते ….
इश्क की ख्वाहिशें
अधूरी ही रह जाती हैं
तब जब दो प्रेमी
बंध तो जाते हैं
एक अनजान रिश्ते में
मगर खुद को आज़ाद नही कर पाते
सामाजिक बेडियो से …
इश्क की ख्वाहिशें
अधूरी ही रह जाती हैं
तब जब मौहब्बत होकर भी
बयाँ नही की जाती ….
इश्क की ख्वाहिशें तब
अधूरी बिलकुल अधूरी
ही रह जाती हैं ….!!

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