Hindi Poem (हिंदी कविता)

मेरी आत्मा ….

Posted On October 9, 2016 at 6:07 pm by / No Comments

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ये मेरे अंदर जो मेरी आत्मा है न
ये मुझसे खुश नही है ……
इसे नही पसंद
मेरा यूँ इस घुटन में जीना
ये तो चाहती है
खुली हवा में साँस लेना …..
इसे नही अच्छा लगता
मेरा घर से इतनी दूर रहना
माँ के बिना जीना
ये तो चाहती है
हर पल बस माँ की छाया में रहना
बेफिक्र होकर जीना
माँ के हाथो का बना खाना-खाना
ये जो मेरे अंदर मेरी आत्मा है न
ये मुझसे खुश नही है ……
ये मुक्त होना चाहती है
मेरे ख्वाबो के बोझ से
ये अब और नही ढोना चाहती
मेरी ख्वाहिशो को
मेरी उम्मीदों को
अपने सर पर …….
ये मेरे अंदर जो मेरी आत्मा है न
ये मुक्त होना चाहती है
मुझसे ….
मेरे अंदर की घुटन से ….
मेरे आंसुओ से ……
इसे अब मैं पसंद नही हूँ …….
ये जो मेरे अंदर मेरी आत्मा रहती है न …..
ये पिंजरा तोड़कर अब उड़ जाना चाहती है
ये जो मेरे अंदर मेरी आत्मा है न …!!!

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