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लंच बॉक्स.

Posted On October 8, 2017 at 3:17 pm by / No Comments

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लंच बॉक्स.

बचपन एक ऐसा किस्सा जिसे जितना भुलाना चाहो उतना याद आता है. दुनिया में कोई वेल्ला इन्सान ही होगा जो अपने बचपन की यादो को अपने साथ लिए न जीता हो. हम सब चाहे उम्र के किसी भी पड़ाव पर क्यों न पहुँच जाये बचपन की यादो से पीछा नही छुड़ा पाते. दुःख में सुख में बचपन के किस्से ही हमे हंसाते हैं. बीते हुए सुनहरे वक़्त की याद दिलाते हैं. बचपन के ऐसे ही हसीं किस्सों में एक किस्सा है लंच बॉक्स का. लंच बॉक्स जो बहुत ही खास होता है हमारे लिए. लंच बॉक्स एक एहम रोल निभाता है हमारे जीवन में.

बचपन में पांचवी क्लास तक जब हम स्कूल जाते थे तब लंच बॉक्स साथ लेकर नही जाते थे. क्योंकि स्कूल की आधी छुट्टी जब होती थी तो सब बच्चो को खाना खाने के लिए अपने घर जाने की छूट होती थी. तो हम भी घर आकर ही कुछ खा-पी लिया करते थे. पांचवी क्लास तक हम सरकारी स्कूल में पढ़े हैं. जब हम सरकारी स्कूल में पढ़ते थे तब सरकारी स्कूल में एक नियम होता था कि हर महीने सब बच्चो को पांच किलो आनाज दिया जाता था और उस दिन जिस दिन स्कूल में अनाज दिया जाता था न तो आधी छुट्टी होती थी और न ही स्कूल की जल्दी छुट्टी होती थी. अनाज दिए जाने वाले दिन सभी बच्चो को पूरा दिन स्कूल में ही रहना पड़ता था.

मुझे आज भी अच्छे से याद है कि जिस दिन स्कूल में अनाज बांटा जाता था उस दिन मम्मी हमे लंच बॉक्स दिया करती थी जिसमे परांठे और आम का अचार होता था. स्कूल में खाये वो पराठो और अचार की खुशबु अब भी मुझे महसूस होती है. मन करता है कि फिर से बचपन के उन्ही दिनों में पहुँच जाऊं और वैसे ही मम्मी लंच बॉक्स में पराठे और अचार रखकर दे और वैसे ही हम सब दोस्त मिलकर साथ में पराठे खायें !

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