Meri Diary Se

कभी-कभी जख्म रूह पर भी होते हैं …..

Posted On November 18, 2017 at 10:04 pm by / No Comments

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कभी-कभी इन्सान जिन्दगी से इतना थक जाता है कि जिंदगी से दूर भागने लगता है. दूर भागना कोई उपाय नही है लेकिन दूर भाग जाना ही एकमात्र उपाय लगता है.

हर रोज़ एक नया गम मिल जाता है जिंदगी को
बस जिंदगी के हिस्सेदार अलग होते हैं …

बहुत कोशिश करते हैं प्रैक्टिकल होने की लेकिन अंदर जो एक सेंसिटिव और इमोशनल इन्सान रहता है वह गाहे-बगाहे जाग ही जाता है. अपना दुःख इतना दर्द नही देता जितना दुसरो का गम देता है. हर एक बुरी घटना मन पर इतना गहरा असर छोडती है कि कुछ ऐसा महसूस होने लगता है जो उदासी से ज्यादा और आंसुओ से कम होता है. सब कुछ छोड़कर कहीं भाग जाने का मन होता है. कहीं ऐसी जगह जहाँ दिलो से दिलो का कोई बंधन न हो. जहाँ न कोई हो, न कहीं कुछ भी बुरा घटित होने का दुःख हो. जहाँ न किसी की जिंदगी से ख़ुशी महसूस हो न किसी की मौत से दुःख.

कभी-कभी लगता है जीवन इसी का नाम है. और कभी लगता है जीवन इसी का नाम क्यों है ? जीवन इससे बेहतर क्यों नही हो सकता? क्या हर रोज़ दुःख में रहना नियति है, फिर वो दुःख चाहे अपना हो या किसी ऐसे इन्सान का जिसे आप जानते भी नही. या फिर उस जानवर जिसका जिक्र तक आप के दिमाग में नही आता.

कहने को अभी बस इतना ही है, भावनाएँ अनगिनत हैं, लेकिन सबको शब्द मिल जाये ये कहाँ मुमकिन है.

कभी-कभी कुछ टूटता सा रहता है अंदर
कभी-कभी जख्म रूह पर भी होते हैं …..

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