Shayri

हूँ अंधेरो में कभी, कभी उजालो में हूँ

Posted On March 10, 2016 at 11:25 am by / 2 Comments

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry

हूँ अंधेरो में कभी, कभी उजालो में हूँ
मैं कहीं नही हूँ बस तेरे ख्यालो में हूँ

छोड़ दी है कोशिश अब तो समझाने की तुझे
कि मैं आवाराओ में नही तेरे दीवानो में हूँ

पूछते हैं लोग मुझसे मेरी उदासी का सबब
क्या कहूँ उनसे कि मैं उलझा किन सवालो में हूँ

जाने क्यों दिल करता है मिटने को इश्क़ में तेरे
पागल हूँ मैं या ज्यादा समझदारो में हूँ

तुम न समझोगी कभी मोहब्बत मेरी जानता हूँ
जानता हूँ कि आजकल मैं बेकारों में हूँ …..!!!

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry

2 thoughts on “हूँ अंधेरो में कभी, कभी उजालो में हूँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *