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गुजरा हुआ इश्क …

Posted On February 26, 2017 at 1:22 pm by / No Comments

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सुधांशु आज कुछ खोया-खोया सा था, अमर ने ऑफिस में उसे उसकी डेस्क पर यूँ चुपचाप बैठे और कंप्यूटर स्क्रीन को टकटकी लगाकर देखते हुए देखा तो उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछने लगा ….

क्यों भाई, किस सोच में डूबे हो? कल वैलेंटाइन डे का प्रोग्राम बना रहे हो क्या ?

अमर की बात सुनकर सुधांशु के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट आ गयी, उसने अपने जीमेल अकाउंट को मिनीमाइज करते हुए कहा …

वैलेंटाइन डे तो कब का आकर चला गया, अब तो बस गुजरे हुए लम्हों की यादो के साथ जीना सीख रहा हूँ….
क्या ? वैलेंटाइन डे कहाँ चला गया, कल ही तो है वैलेंटाइन डे. तू कौन सी दुनिया में खोया है ?
अमर की बात सुनकर सुधांशु फिर से मुस्कुरा दिया ….

सुधांशु को ये ऑफिस ज्वाइन किये अभी बस दो महीने ही हुए थे. उसकी पिछली जिंदगी के बारे में यहाँ कोई नही जानता था. सुधांशु किसी से ज्यादा बात भी नही करता था सिवाय अमर के. अमर कुछ महीनो में ही उसे उसका अच्छा दोस्त लगने लगा था.

लंच कर लिया तूने? अमर ने सुधांशु के चेहरे पर आये गंभीरता के भाव देखकर पूछा. वह जानता था कि सुधांशु आजकल खाने-पीने पर ध्यान नही देता. वो रोज़ घर से लंच लाता है और रोज़ ऑफिस में ही किसी ने किसी को ऑफर कर देता है. उन सभी के साथ लंच करना बंद सा ही कर दिया है सुधांशु ने.

नही यार भूख नही थी. इसलिए नही किया, तू बता तूने कर लिया ….

हाँ कर लिया हम सब ने तो, कैफेटेरिया से ही तो आ रहा हूँ अभी सीधे. सब लोग कल के प्लान बनाने में बिजी हैं… अमर ने हँसते हुए कैफेटेरिया में घटित सारी बाते सुधांशु को एक-एक कर के बता दी ….

दोनों 5 मिनट तक अमर की बातो पर हँसते रहे ….

चल ठीक है जाता हूँ, नही तो मिसेज वृंदा आ जाएँगी और फिर बोलेंगी – ओनली फाइव मिनट्स आर लेफ्ट. गो तू योर डेस्क मिस्टर अमर.
अमर की बात पर अमर और सुधांशु फिर से खिलखिला कर हँसने लगे ….

रात के 8:30 बज चुके थे सुधांशु अभी भी ऑफिस में बैठा अपना काम निपटा रहा था कि तभी उसके मोबाइल पर एक कॉल आई. किसी महिला की कॉल थी शायद.

सुधांशु की आदत बन गयी थी रोज देर से घर जाना. वक़्त पर खाना न खाना. रात भर जागते रहना. कई बार कई राते उसने रोकर काटी थी…..

कॉल कट जाने के बाद सुधांशु ने जल्दी से अपना बैग उठाया, सारी जरूरी फाइल्स उसमे रखी और जल्दी से बाइक स्टार्ट करके चल पड़ा. शायद कोई जरूरी काम आ गया था.

पुरे 35 मिनट बाद सुधांशु एक घर में था. घर का हॉल बहुत अच्छे से सज़ा हुआ था, हर तरफ गुब्बारे लगे थे. सामने एक बड़ी सी तस्वीर लगी थी और नीचे बड़े से अक्षरों में लिखा था- हैप्पी बर्थडे रिया.

सुधांशु ने आगे बढ़कर सामने लगी तस्वीर को अपने हाथो से छुआ और भरी आँखों से धीरे से कहा – हैप्पी बर्थडे रिया. आई ऑलवेज मिस्ड यू. उसकी आँखों से अब आंसुओ की नदी बह चली थी. वहीं घुटनों के बल बैठकर वह सुबक-सुबक कर रोने लगा तभी पीछे से किसी की आवाज़ आई – रिया तुम्हारे साथ है. वो सब देख रही है. रोना बंद करो सुधांशु जिंदगी किसी के जाने से नही रूकती. तुम्हे आगे बढ़ना ही होगा रिया की खातिर.

सुधांशु ने पीछे मुड़कर देखा, माँ खड़ी थी, रिया की माँ. वह खड़ा हुआ और माँ के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगा. माँ की आँखों में भी आंसू थे.

आज रिया का बर्थडे था. और आज से ठीक 2 दिन बाद उसकी और सुधांशु की होने वाली शादी की सालगिरह जो बदकिस्मती से नही हुई. शादी वाले दिन ही रिया की पार्लर से लौटते समय कार एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी. 2 दिन बाद रिया को इस दुनिया से गये पुरे 2 साल हो जायेंगे.

रिया चली गयी मगर सुधांशु आज भी वही खड़ा है रिया के इंतजार में. उसकी यादो के साथ खुद को जिंदा रखने की कोशिश करते हुए.

12 बज गये थे, सुधांशु एक बार फिर से सामने लगी रिया की तस्वीर के पास गया और बोला – हैप्पी वैलेंटाइन डे रिया … काश आज तुम यहाँ होती मेरे साथ ….. !!

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