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पटाखे जलाने नहीं जलाने का अधिकार हमें होना चाहिए …

Posted On October 11, 2017 at 5:05 pm by / No Comments

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जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आती जाती है हर वर्ष सोशल साइटस् पर एंटी-क्रेर्कस, एंटी-चाईना प्रोडक्टस अभियान शुरु हो जाते हैं। इस बार तो हाईकोर्ट ने दिल्ली में कानूनी रूप से भी पटाखो पर रोक लगा दी है। इस बात को लेकर फेसबुक पर हर रोज 10-20 पोस्ट पढ़ने को आराम से मिल जाती हैं। कोई इसे हिन्दू विरोधी बताता है कोई पर्यावरण के हित का हवाला देता है।

दिवाली खुशियों भरा त्यौहार है. हिन्दू धर्म में दिवाली से बढ़कर शायद ही कोई दूसरा त्यौहार हो. घरो से दूर रहने वाले लोग होली पर अपने घर जायें या न जायें दिवाली पर जरूर जाते हैं।

 

अगर गहराई से अवलोकन किया जाये तो हम पायेंगे कि पहले के मुकाबले अब दिवाली पर बहुत ही कम पटाखे जलाये जाते हैं। मैं अगर अपने आस-पास की बात करूं तो अब पहले की तुलना में 50% कम पटाखे जलाये जाते हैं। कुछ वर्ष पहले तक दो-तीन दिन पहले ही हम लोग पटाखे फोड़ना शुरू कर देते थे और दिवाली के अगले दो-तीन दिन तक जब तक पटाखे खत्म नहीं हो जाते थे जलाते ही रहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब इतना वक्त ही नही होता किसी के पास. अब हम दिवाली के दिन ही सिर्फ दो-चार पटाखे जलाते हैं वो भी इसलिए क्योंकि वर्ष में सिर्फ एक बार ही हमें ऐसा करने का मौका मिलता है। और फिर बिना पटाखो के दिवाली का शुभारम्भ भी तो नही लगता।

म जैसे वर्षो से अपने त्यौहार मनाते आ रहे हैं हमें वैसे ही उन्हें मनाने का अधिकार होना चाहिए। पटाखे जलाना नहीं जलाना इसका निर्णय लेने का अधिकार भी हमें होना चाहिए।

और ये कौन सा न्याय है कि बाकि दिन घर गन्दा पड़ा रहे और जिस दिन मेहमान आने वाले हों उस दिन सफाई कर लो। कोई फायदा है इस बात का, ये तो बस दिखावा ही हुआ न.

अगर आप सच में ही पर्यावरण बचाना चाहते हैं तो उन पेड़ो को कटने से बचाइये जिन्हें आप विकास के नाम पर काट देते हैं. उन नदियों को दूषित होने से बचाइये जिनमें आप बेहिसाब कूड़ा बहाते हैं। क्या आप जानते हैं कि आप के घर का कूड़ा आप के घर से निकल कर कहां जाता है, उससे पर्यावरण को कितना नुकसान या फायदा पहुंचता है.

दम सिर्फ पटाखो के धुंए से नही घुटता, दम उस कूड़े के ढेर के पास से गुजरने से भी घुटता है जिससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता और जो हमारे ही घर का कूड़ा होता है। दम फैक्टरियों से निकलने वाले धुंऐ से भी घुटता है, क्या आपने कभी अपने आस-पास की फैक्टरियों को बन्द करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है? दम सड़कों पर दौड़ती हुई उन बेहिसाब गाडियों के धुंए से भी घुटता है जिनमें एसी ऑन कर के आप आराम से सफर करते हैं, क्या आपने कभी न्यायालय में यह याचिका दायर की है कि आपके घर की, आप के आस-पडौस की, आप के शहर की गाड़ियों पर रोक लगा दी जाये क्योंकि इन सबसे प्रदूषण फैलता है या प्रदूषण का ख्याल सिर्फ दिवाली पर ही आता है?

हम लोग इतने समझदार तो अब हो ही गये हैं कि यह समझ सकें कि क्या हमारे लिए अच्छा है और क्या बुरा । दिवाली पर कुछ पटाखे जला लेने से इस दुनियां में वैसे भी कुछ नही बदलना, हर रोज इतने लोग अपनी जान गंवा रहे हैं छोटी-छोटी बातों पर होने वाली हत्याओं में, मासूम बच्चियों के रेप हो रहे हैं, बिना किसी जुर्म के छोटे-छोटे बच्चों को मार दिया जा रहा है, घर से अकेले निकलते हुए डर लगता है, बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है, हर तरफ तो मौत का साया हमारे साथ-साथ चल रहा है. अगर आप सच में इस दुनियां को जीने लायक बनाना चाहते हैं, प्रदूषण मुक्त करना चाहते हैं तो ये जो हर तरफ हवाओ में नफरत का धुंआ फैला है ना इसे खत्म करने के बारे में कुछ निर्णय लीजिए. जो हत्याओं के, रेप के और बाकि गुनाहों के मामले आपने लटका कर रखें हैं उन पर फैसला दीजिए. गाड़ियों की संख्या निर्धारित करियें, अनावश्यक फैक्टरियों को बन्द कराईये. जंगलों को जीवित करिये, मरते हुए खेतों की मिट्टी को सींचियें, अगर आप ये सब करने में सफल होते हैं तो यकीन मानिए आप को कभी किसी दिवाली पर पटाखे बैन करने की आवश्यकता नहीं पडेगी।

जीवन में बहुत कम मौके होते हैं खुश होने के लिए, दिवाली पर कुछ मुरझाये चेहरों पर कुछ फूलझड़ी और पटाखे खुशी ले आते हैं। आप बड़े लोग हैं नही जानते होंगे लेकिन हमने उन चेहरो को बड़े नजदीक से देखा है।

Happy Deepawali to All of You. आप सभी को दीपावली की ढ़ेरो शुभकामनाएं।

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