Hindi Poem (हिंदी कविता)

जज्बात …

Posted On January 31, 2017 at 1:14 pm by / No Comments

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गोल-गोल घुमती दुनिया में
अक्सर मैं एक कौने पर आकर
ठहर जाती हूँ ….
वो कौना जो मैंने
खुद से नही माँगा
वो कौना जो मुझे थमा दिया
नियति ने मेरे कदमो की
रफ़्तार देख कर ……
मेरी आँखों में तुम
हमेशा विद्रोह देखते हो
कभी तो मेरी मज़बूरी भी देखा करो
मज़बूरी बनाई नही जाती
वो खुद-ब-खुद पैदा हो जाती है
जिंदगी-ऐ-हालात देख कर …..
पेड़ पर लगे सूखे पत्तो में
और साख से टूट कर बिखरे हुए पत्तो में
बहुत फ़र्क होता है …..
जिस दिन तुम ये फ़र्क समझ जाओगे
उस दिन मेरी आँखों के नीचे के
काले धब्बो का अर्थ भी तुम जान लोगे …..
वो शब्द जो मैं लिखती हूँ
वो मेरे खुद के बनाये हुए नही होते
वो उन घावो से रिसते हैं
जो कुछ अपनों से मिले हैं
और कुछ जमाने से ……
गोल-गोल घुमती दुनिया में
अक्सर मैं एक कौने पर आकर
ठहर जाती हूँ ……!!!

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