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ढलती हुई जिंदगी ….

Posted On July 2, 2017 at 10:48 pm by / No Comments

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तो ये रिश्ता पक्का समझे हम ?, रिषभ और अदिति के आने के बाद सभी घर वालो ने उनकी ओर बड़ी उम्मीद से देखते हुए पूछा …

रिषभ ने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिला दी लेकिन अदिति कुछ देर चुप ही रही. अदिति की चुप्पी माँ-पापा के चेहरे पर कुछ चिंता के भाव ले आई. अदिति को चुप खड़े देखकर माँ ने उसके पास आकर फिर से प्यार से उससे पूछा  “क्या तुम्हारी हाँ है अदिति”? 

माँ वो मुझे, मुझे थोडा वक़्त चाहिए सोचने के लिए, अदिति ने नज़रे झुकाकर माँ की बात का जवाब दिया. 

अदिति के इस जवाब से वहाँ मौजूद सभी लोगो के चेहरों पर कुछ चिंता की लकीरे उभर आई. रिषभ के घरवाले अब टकटकी लगाये अदिति के परिवार के ओर देख रहे थे.  कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया हो जैसे. कमरे की ख़ामोशी को तोड़ने की शुरुआत रिषभ ने की. 

“ठीक है, मुझे कोई प्रॉब्लम नही है, आप जितना समय लेना चाहें ले सकती हैं”, रिषभ ने अदिति की ओर देखते हुए कहा ….

थोड़ी देर बाद कुछ जरूरी बातो के बाद रिषभ और उसका परिवार अपने घर चला गया. अदिति अपने कमरे में चली गयी और माँ, पापा, भाई सब उसके “कुछ समय मांग लेने की बात” के पीछे के कारण को खोजने में जुट गये….

इस रिश्ते के लिए घरवालो को बिना कोई जवाब दिए ही अदिति अपने हॉस्टल लौट गयी, ये कुछ दिनों का समय न जाने कितने दिनों में बदलने वाला था. अदिति एक मल्टीनेशनल कंपनी में CA की पोस्ट पर काम करती थी. अच्छी खासी सैलरी थी उसकी. उसके ऑफिस से कुछ दूरी पर ही एक वर्किंग वीमेन हॉस्टल था जहाँ वह रहती थी. ऑफिस से आने के बाद वह रोज़ घर पर बात करती और माँ रोज़ उससे एक ही सवाल पूछती – “कुछ सोचा बेटा”. माँ के सवाल का जवाब अदिति ने रट लिया था. “सोच रही हूँ माँ, बस कुछ दिन और रुक जाओ”. माँ रोज़ अपना सवाल दोहराती और अदिति रोज़ अपना जवाब. कभी-कभी ऐसा होता था कि या तो माँ गुस्से से फ़ोन रख देती थी या फिर अदिति रोज़ एक ही सवाल से इरिटेट होकर माँ के सवाल के तुरंत बाद ही फ़ोन डिसकनेक्ट कर देती. ये सिलसिला महीने भर तक चलता रहा. न माँ का सवाल बदला न अदिति का जवाब. हाँ अब माँ का सवाल बातो में सबसे पहले होने की बजाये सब से अंत में होने लगा था. फ़ोन रखने से पहले वो रोज़ एक बार पूछ लिया करती -“कुछ सोचा बेटा”. 

शाम के 8 बजे थे. अदिति ने ऑफिस से लौटकर हाथ-मुंह धोये और माँ को फोन मिला दिया.

“हेल्लो माँ, क्या कर रहे हो आप? मुझे आप से कुछ बात करनी है “, …..

“हेल्लो, हाँ, मैं ठीक हूँ, कहकर माँ ने अदिति से उसके ऑफिस में बीते पुरे दिन के बारे में पूछना शुरू किया, खाना खाया या नही, तबियत ठीक है आदि आदि आदि ……

“माँ, वो मैं कह रही थी कि …..

“हाँ बोलो, मैं सुन रही हूँ ……

“माँ, वो, वो मुझे, मुझे शादी नही करनी”…..

इधर अदिति ने ये वाक्य पूरा किया और उधर माँ के पैरो के नीचे से जैसे जमीन खिसक गयी हो. “क्यों शादी नही करनी, क्या हुआ? सब ठीक तो है”, माँ ने एक ही साँस में सब सवाल अदिति के सामने रख दिए थे …..

“हाँ सब ठीक है माँ, बस ऐसे ही शादी नही करनी”, आप पापा से कहिये उस रिश्ते के लिए मना कर दें ……

अगले दो घंटो तक अदिति फ़ोन पर अपने घरवालो को समझती रही. शादी न करने के अलग-अलग बहाने बताती रही. अंत में तय हुआ कि वो इसी महीने छुट्टी लेकर घर आ जाये. अब जो भी बात होगी उसके घर आने के बाद ही होगी. 

फ़ोन रखने के बाद अदिति अपने ऑफिस बैग के पास गयी और कुछ पेपर्स निकाल कर ध्यान से देखने लगी. अचानक ही उसकी आँखों से आंसू बहकर उन पेपर्स पर आ गिरे. ये उसकी फाइनल मेडिकल रिपोर्ट थी जिसमे लिखा था कि उसे stomach कैंसर है. सेकंड स्टेज का ये कैंसर कभी भी उसकी जान ले सकता था. पिछले 3-4 महीनो से जो उसे पेट में भयानक दर्द हो रहा था वो इसी वजह से था.  

अपने हाथ में अपनी फॅमिली फोटो लिए अदिति बिना कुछ खाये कब सो गयी उसे पता ही नही चला. 

 

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