Meri Diary Se

कभी-कभी जख्म रूह पर भी होते हैं …..

कभी-कभी इन्सान जिन्दगी से इतना थक जाता है कि जिंदगी से दूर भागने लगता है. दूर भागना कोई उपाय नही है लेकिन दूर भाग जाना ही एकमात्र उपाय लगता है. हर रोज़ एक नया गम मिल जाता है जिंदगी को बस जिंदगी के...
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पटाखे जलाने नहीं जलाने का अधिकार हमें होना चाहिए …

जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आती जाती है हर वर्ष सोशल साइटस् पर एंटी-क्रेर्कस, एंटी-चाईना प्रोडक्टस अभियान शुरु हो जाते हैं। इस बार तो हाईकोर्ट ने दिल्ली में कानूनी रूप से भी पटाखो पर रोक लगा दी है। इस ब...
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लंच बॉक्स.

लंच बॉक्स. बचपन एक ऐसा किस्सा जिसे जितना भुलाना चाहो उतना याद आता है. दुनिया में कोई वेल्ला इन्सान ही होगा जो अपने बचपन की यादो को अपने साथ लिए न जीता हो. हम सब चाहे उम्र के किसी भी पड़ाव पर क्यो...
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धार्मिक भावनाएं…

मेरी भावनाएं (धार्मिक भावनाएं) किसी के भी कुछ भी कहने पर कभी आहत नहीं होती. क्योंकि मुझे मालूम है कि किसी इंसान के द्वारा भगवान को कहे गये अपशब्दो का भगवान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. भगवान भगवान होते...
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जहां सब कुछ है भी और कुछ भी नही है.

जब आपके आसपास कोई नही होता आपके मन की बात समझने वाला तब बस एक ही तरीका बाकि रह जाता है मन के बोझ को कम करने का और वो है कोरे पन्नों के साथ अपनी बात को शेयर कर लेना. कोई आपकी बात समझें या नही समझें य...
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मुक्ति….

शरीर और आत्मा के अलग हो जाने को मुक्ति नही कहा जा सकता. मुक्ति तो शरीर और आत्मा दोनों के एक साथ मिलकर एक ऐसी राह पर चलने से मिलती है जहाँ मोह और माया का जाल नही फैला होता. मुक्त होने के लिए मरने क...
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है….

समाज भी बिलकुल एक संस्था के जैसा है. जिसका एक प्रथक अस्तित्व है. जो है तो लेकिन जिसे छुआ नही जा सकता, स्मेल नही किया जा सकता. जैसे एक संस्था या संगठन का कोई प्रॉपर चेहरा नही होता बस एक साख होती है व...
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बचपन कभी-कभी जिंदा होने लगता है…

वो मिट्टी जिसमे हम जन्म लेते हैं उसकी महक हमारी सांसो में बसी होती है. हम चाहे दुनिया के किसी भी कौने में रहें हमारी जन्मभूमि की महक हमारे साथ-साथ होती है. हम जब भी साँस लेते हैं महसूस करते हैं अप...
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काश वो होते …. !!!

अपने घर में बैठकर अब ये महसूस नही होता कि मैं घर में बैठा हूँ. मेरा घर अब दीवारों में तब्दील हो गया है जहाँ लोग रहते तो हैं मगर नफरत से. एक-दुसरे के कट्टर दुश्मन. मेरे घर का वो आँगन जो कभी खिल-खिल...
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Meri Diary Se

जिंदगी एक हादसा है जो रोज़ होता है. कभी हम बच जाते और कभी मर जाते हैं.

इन्सान जब इस धरती पर जन्म लेता है तब वह जन्म लेते ही अनेक रिश्तो से घिर जाता है. इस धरती पर इन्सान के रूप में आने के बाद हम किसी के रिश्तेदार हो जाते हैं, किसी के दोस्त हो जाते हैं, किसी के बेटा...
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