Article

A Dream still is a dream.

Posted On October 15, 2017 at 4:06 pm by / No Comments

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
4

मेरा बड़ा मन था कि मैं एक ऐसे ऑफिस में काम करूं जहां मेरा खुद का एक खूबसुरत सा कैबिन हो, एक सुन्दर सी, शान्त सी जगह पर बैठकर मैं काम करूं।

सबसे पहले जब मैंने जॉब करनी शुरू की थी तब एक छोटे से ऑफिस से शुरुआत की थी। वहां हमारे लिए कोई कैबिन नहीं था। भाग-दौड़ वाली जॉब थी तो कैबिन में बैठने का वक्त भी नहीं होता था। हां जो लोग ऑफिसियल वर्क देखते थे बस वही कैबिन में बैठते थे।

उसके बाद मैंने एक सरकारी कार्यालय जॉइन किया. सरकारी ऑफिस कैसे होते हैं यह मैंने सिर्फ टीवी में ही देखा था. फिर जब खुद सरकारी ऑफिस जॉइन किया तब पता चला कि टीवी में जो हालत सरकारी कार्यालयों की दिखायी जाती है वास्तव में भी सरकारी कार्यालय ऐसे ही होते हैं। वो लोहे के रैक, लकड़ी की कुर्सियां, मेज, BSNL वाला टेलीफोन और दुनिया भर की पुरानी-पुरानी फाइलें सब वैसा ही था जैसे अक्सर टीवी में दिखाया जाता है 🙂 🙂 

ऑफिस जॉइन करने के कुछ समय तक मुझे अलग से कोई कैबिन नहीं मिला था, एक बड़े से हॉल में बैठकर ही हमें काम करना होता था जहां और भी कई लोग बैठते थे। लेकिन वो कहते है न कि भगवान के घर देर है अन्धेर नही 🙂 :), बस वही हुआ, लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद आखिर वो दिन आ ही गया जब मुझे मेरा पहला (और शायद आखिरी) कैबिन मिला जहां मैं अकेली बैठती थी। अपना अलग कम्प्यूटर था, लैंड़लाइन फोन था, स्कैनर था, फैक्स मशीन थी, प्रिन्टर था, टेबल थी, चेयर थी. कुल मिलाकर उस कैबिन में सब कुछ था, लेकिन सुन्दरता नहीं थी। हालांकि कैबिन के बाहर एक बालकनी भी थी, आसपास बहुत सारे पेड़ भी थे, शान्ति भी थी, लेकिन फिर भी वो सुन्दरता नहीं थी जिसकी मैंने कल्पना की थी।

वैसे भी जिस चीज की जैसे हम कल्पना करते हैं वो हमें मिलती कहां है।

2.5 वर्ष उस सरकारी कार्यालय में काम करने के बाद मैंने एक नया ऑफिस जॉइन किया. मगर अपना एक खूबसुरत सा कैबिन होने की ख्वाहिश यहां भी बस एक ख्वाहिश ही बनकर रह गयी। अब देखते हैं मेरी आंखो का ये सपना कब पूरा होता है।

आपका भी ऐसा कोई सपना हो तो जरूर शेयर करें। देखते हैं किसके कितने सपने अधूरे हैं 🙂 🙂 

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *